प्रेस विज्ञप्ति

इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, पूर्वी इकाई द्वारा विवेकानंद जयंती के अवसर पर 12 जनवरी, 2020 को “पर्यावरण संरक्षण – भारतीय अवधारणा और जनसहभागिता” विषय पर आयुष्म आयुर्वेदिक एवं नेचुरोपैथी सेंटर, नई दिल्ली  में विचार गोष्ठी आयोजित की गई । गोष्ठी का प्रारम्भ भारतीय परंपरा अनुसार दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्प अर्पण कर किया गया । गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ भगवती प्रकाश शर्मा जी (उपकुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय) व अध्यक्षता श्री शिव कुमार जी (आयुष्म संचालक) ने की। विचार गोष्ठी का उद्देश्य एवं अतिथि परिचय सभा के समक्ष श्री विनोद शर्मा ‘विवेक’ (प्रमुख, इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, दिल्ली प्रान्त) जी द्वारा दिया।

गोष्ठी का प्रारंभ विजेता पब्लिक विद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा लघुनाटिका “वृक्ष की व्यथा” प्रस्तुत कर  तथा प्रसिद्ध कवि श्री दिलीप पांडे द्वारा पर्यावरण पर काव्य-पाठ के माध्यम से श्रोताओं को पर्यावरण सरंक्षण का संदेश देकर किया गया। साथ ही इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य करने के लिए श्रीमती मंजू खन्ना जी को सम्मानित भी किया गया। इसके पश्चात “पर्यावरण संरक्षण – अपनी भूमिका (तथ्य एवं व्यवहार)” पुस्तक का विमोचन भी मंच पर उपस्थित अतिथियों के द्वारा किया गया।

विचार गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ भगवती प्रकाश शर्मा जी (उपकुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय) ने बताया कि पर्यावरण, ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य उपहार है जो संपूर्ण मानव समाज का एकमात्र महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। यदि मानव समाज प्रकृति के नियमों का भलीभाँति अनुसरण करें तो उसे कभी भी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं में कमी नहीं रहेगी। मनुष्य अपनी आकश्यकताओं की पूर्ति के लिए वायु, जल, मिट्टी, पेड-पौधों, जीव-जन्तुओं आदि पर निर्भर हैं और इनका दोहन करता आ रहा हैं।

वर्तमान युग औद्योगिकीकरण और मशीनीकरण का युग है। जहाँ आज हर काम को सुगम और सरल बनाने के लिए मशीनों का उपयोग होने लगा हैं, वहीं पर्यावरण का उल्लंघन भी हो रहा हैं। ना ही पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है और ना ही प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य तत्वों का सही मायने में उपयोग किया जा रहा हैं।

आज हमें सर्व सहभागिता के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर सच्चे मन से प्रयास करने ही होंगे । व्यापक पैमाने पर वृक्षारोपण करने हेतु अभियान चलाने, जन-जागृति लाने जैसी मुहिम इस दिशा में सार्थक पहल होगी। हमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस कथन पर विचार करना चाहिए- ”पृथ्वी हमें अपनी ज़रुरत पूरी करने के लिए पूरे संसाधन प्रदान करती है लेकिन लालच पूरा करने के लिए नहीं।’

विचार गोष्ठी का मंच संचालन श्रीमती कमलेश नागर और धन्यवाद ज्ञापन श्री प्रवीण कपूर जी द्वारा किया गया। इस विचार गोष्ठी में शिक्षाविद, प्रशासक, इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र की केंद्रीय टोली के सदस्य, रा.स्व.संघ के कई वरिष्ठ कार्यकर्त्ता, शोध-छात्र, विद्यार्थी, उद्यमी आदि 115 प्रबुद्ध जनों ने भाग लिया।

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