राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सनातन संस्कृति एवं योग” राष्ट्रीय वेब गोष्टी दिन-1

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
एवं इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली के सयुक्त तत्वाधान से दिनांक 20 – 21 सितम्बर 2020, समय अपराह्न 04:00
दो दिवसीय राष्ट्रीय वेब-गोष्ठी का अयोजन किया गया ।
प्रथम दिवस: 20/09/20
विषय: “सनातन संस्कृति एवं योग
कार्यक्रम का शुभारंभ 4:00 बजे हुआ डाॅ० सीमा सदस्य अध्ययन केन्द्र द्वारा सभी का स्वागत व अभिनन्दन किया गया ।उसके पश्चात श्रीमति ज्ञानिका शुक्ला जी द्वारा माॅ सरस्वती वन्दना किया गया । अतिथि परिचय व स्वागत डाॅ०प्रवीण कुमार (कार्यक्रम सचिव व सदस्य इन्द्रप्रस्थ अध्यन केंद्र प्रमुख )/ श्रीमान मूलचन्द्र सिंह जी ( कार्यक्रम सह सचिव व सह मुख्य शिक्षक इन्द्रप्रस्थ अध्यन केंद्र) द्वारा दिया गया । डॉ० सीमा द्वारा सर्व प्रथम आमंत्रित किया
श्रीमान विनोद शर्मा विवेक जी प्रमुख अध्ययन केन्द्र जिन्होंने इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली के उद्देश्य व किये जा रहे कार्य को सभी के समक्ष रखा । तत्पश्चात मुख्य वक्ता मा0 इंद्रेश कुमार जी का विषय पर कहा गया की योग को वयय मुक्त उपचार का नाम दिया। योग विश्व सर्वमान्य नीरोग्ता का मार्ग है ।यह शरीर,मन एवं बुद्धि का उपचार करता है । सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के मूल्यों को अपना कर हीं इस कोविद की महामारी से बचा जा सकता है । इस महामारी को चीन का षडयंत्र का नाम दिया। उनके अनुसार चीन विश्व का दानवीये चेहरा है और भारत मानवीय चेहरा ।

 

विशिष्ट अतिथि *डॉ॰ प्रणव पंड्या मा० कुलाधिपति,देव संस्कृति विश्वविद्यालय,उत्तराखंड, प्रमुख शांतिकुंज एवं गायत्री परिवार अस्वस्थ होने के कारण इस बेबिनार में शामिल नहीं हो सके परन्तु उन्होंने अपने अशीष वचन प्रतिकुलपति डाॅ० चिन्मय पांड्या जी ,देव संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, के माध्यम से प्रेषित किए । आपके अनुसार योग को चित की कमियों को दूर करने का कार्य करता है । आज की इस विषम परिस्थितियों में इस तरह के विषय पर इस तरह की गोष्ठी का आयोजन कर इन्द्रप्रस्थ अध्यन केन्द्र ने जो कार्य किया है इसके लिए वह साधुवाद के पात्र हैं । योग के द्वारा मन की भावनाओं को नियंत्रण में कर जीवन को आनन्द से भरा जा सकता है ।

                       

मुख्य अतिथि प्रो० दिलीप दुरेया जी कुलपति लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, गवलियार ने योग की मह्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल एक शारीरिक क्रिया मात्र नहीं है अपितु यह एक विचार है जो जीवन के हर पल के साथ हमें जोड़ता है। आज के कोविद के समय से यह प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ने में सहायक है ।
कार्यक्रम अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ एवं इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली के सयुक्त तत्वाधान से दिनांक 20 – 21 सितम्बर 2020, समय अपराह्न 04:00
दो दिवसीय राष्ट्रीय वेब-गोष्ठी का अयोजन किया गया ।
प्रथम दिवस: 20/09/20
विषय: “सनातन संस्कृति एवं योग
कार्यक्रम का शुभारंभ 4:00 बजे हुआ डाॅ० सीमा द्वारा सभी का स्वागत व अभिनन्दन किया गया ।उसके पश्चात श्रीमति ज्ञानिका शुक्ला जी द्वारा माॅ सरस्वती वन्दना किया गया । अतिथि परिचय व स्वागत डाॅ०प्रवीण कुमार (चौ० च०सिं०वि०वि०मेरठ) (कार्यक्रम सचिव व सदस्य इन्द्रप्रस्थ अध्यन केंद्र प्रमुख )/ *श्रीमान मूलचन्द्र सिंह जी ( कार्यक्रम सह सचिव व सह मुख्य शिक्षक इन्द्रप्रस्थ अध्यन केंद्र) द्वारा दिया गया । डॉ० सीमा द्वारा सर्व प्रथम आमंत्रित किया
श्रीमान विनोद शर्मा विवेक जी प्रमुख अध्ययन केन्द्र जिन्होंने इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली के उद्देश्य व किये जा रहे कार्य को सभी के समक्ष रखा । तत्पश्चात मुख्य वक्ता मा0 इंद्रेश कुमार जी विषय पर कहा गया की योग को वयय मुक्त उपचार का नाम दिया। योग विश्व सर्वमान्य नीरोग्ता का मार्ग है ।यह शरीर,मन एवं बुद्धि का उपचार करता है । सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के मूल्यों को अपना कर हीं इस कोविद की महामारी से बचा जा सकता है । इस महामारी को चीन का षडयंत्र का नाम दिया। उनके अनुसार चीन विश्व का दानवीये चेहरा है और भारत मानवीय चेहरा ।

विशिष्ट अतिथि *डॉ॰ प्रणव पंड्या मा० कुलाधिपति,देव संस्कृति विश्वविद्यालय,उत्तराखंड, प्रमुख शांतिकुंज एवं गायत्री परिवार अस्वस्थ होने के कारण इस बेबिनार में शामिल नहीं हो सके परन्तु उन्होंने अपने अशीष वचन प्रतिकुलपति डाॅ० चिन्मय पांड्या जी ,देवसंस्कृति विश्वविद्यालय,
उत्तराखंड, के माध्यम से प्रेषित किए । आपके अनुसार योग को चित की कमियों को दूर करने का कार्य करता है । आज की इस विषम परिस्थितियों में इस तरह के विषय पर इस तरह की गोष्ठी का आयोजन कर इन्द्रप्रस्थ अध्यन केन्द्र ने जो कार्य किया है इसके लिए वह साधुवाद के पात्र हैं । योग के द्वारा मन की भावनाओं को नियंत्रण में कर जीवन को आनन्द से भरा जा सकता है ।
मुख्य अतिथि प्रो० दिलीप दुरेया जी कुलपति लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, गवलियार ने योग की मह्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल एक शारीरिक क्रिया मात्र नहीं है अपितु यह एक विचार है जो जीवन के हर पल के साथ हमें जोड़ता है। आज के कोविद के समय से यह प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ने में सहायक है ।
कार्यक्रम अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० नरेन्द्र कुमार तनेजा जी के शब्दों में योग के आठ अंग हैं जो हमारे जीवन के हर भाग को प्रभाव करता है। ये आठ अंग है यम, नियम, असान, प्रायम,आहार, धारणा, ध्यान, स्माधी ।
सभी के उदबोधन के पश्चात धन्यवाद प्रस्तावना डाॅ० राजेन्द्र पांडे जी(चौ० च०सिं०वि०वि०मेरठ) सदस्य अध्ययन केन्द्र द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम सम्पन्न कल्याण मंत्र डॉ० विकास शर्मा जी मुख्य शिक्षक इन्द्रप्रस्थ अध्यन केंद्र द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ सीमा द्वारा रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे अध्ययन केन्द्र मार्गदर्शक मा० श्री अजेय कुमार जी क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख , मा0 श्री कृपा शंकर जी क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आदरणीय श्री राम अवतार जी मेरठ प्रांत संगठन मंत्री इतिहास संकलन योजना, संयोजक प्रोफेसर विजय जायसवाल जी, कार्यक्रम सचिव ड़ॉ प्रवीण कुमार सह सचिव मूलचंद सिंह , डॉ० विकास शर्मा, डॉ० मोनिका, श्री ललित पराशर जी , श्री जगदीश जी व अन्य अध्ययन केन्द्र के सभी कार्यकर्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय से प्रति कुलपति प्रो वाई विमला जी, प्रो शैलेन्द्र सिंह गौरव , प्रोफेसर रुप नारायण जी, Prashant Tyagi Ji, व युगल किशोर, डॉ आराधन जी, राजीव जी, डॉ अमितेश शर्मा जी व विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों छात्रों का का कार्यक्रमा मे रहना हुआ कार्यक्रम मे भारत वर्ष के विभिन्न विश्वविद्यालय राज्यो से 2735 प्रतिभागीयो द्वारा पंजीकरण करवाया गया था । गूगल मीट व फेसबुक लाइव प्रेणना मिडिया द्वारा कार्यक्रम को लाइव दिखाया गया व इन्ही के माध्यम से सभी की सहभागिता की गई और अभी तक इस कार्यक्रम को भारतवर्ष में 7.6 हजार लोगों द्वारा देखा गया है ।
इस कार्यक्रम को हिन्दुस्तान अखबार, दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनवाणी व अन्य कई समचार पत्रों में स्थान दिया गया है ।

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