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भारतीय ज्ञान- विज्ञान परम्परा : मानवीय दृष्टि
(राष्ट्रीय संगोष्ठी)


भारत मंथन - 2021

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Last Date of Abstract Submission:

2 March, 2021

Last Date of Paper Submission:

31 March, 2021

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कार्यक्रम का परिचय:


जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जे.एन.यू, दिल्ली), चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (मेरठ) एवं इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र (दिल्ली) के तत्वाधान में भारत-मंथन-3 राष्ट्रीय संगोष्ठी अप्रैल-2021 में आयोजित होने जा रहा है | इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य-विषय "भारतीय ज्ञान- विज्ञान परम्परा: मानवीय दृष्टि" रहने वाला है और इसमें कुल 13 उप-विषय रहने वाले है | इस संगोष्ठी में प्राध्यापक/प्राध्यापिका वर्ग, शोध-छात्र/छात्राएं एवं अन्य प्रबुद्ध-जन के द्वारा लेख आमंत्रित है |

भारत मंथन-04 - "भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा और मानवीय दृष्टि"


भारत एक संस्कृति है, राष्ट्रकवि दिनकर ने भारत को ‘‘भारत जीवित भास्वर है(नील कमल) कहा। भारत की उदार और ओजस्वी पहचान का आधार उसकी ज्ञान-विज्ञान की वैदिक परंपरा है। वैदिक ज्ञान का स्रोत प्रकृति थी। प्रकृति की शक्तियों, क्षमताओं और उनके महत्व का आकलन कर उनके सहकार- सहयोग-उपयोग को महत्व देने वाली वैज्ञानिक वैदिक मानव की सोच, जिज्ञासा और उनके निष्कर्ष आज भी ज्ञान-विज्ञान की जिज्ञासा और अनुसंधान की प्रेरणा बने है। ज्ञान लौकिक अनुभवों और इन अनुभवों में परिष्कार और विस्तार कर उन्हें अपनी कल्पना के अनुकूल बनाता है। और विज्ञान ज्ञान कीे व्यावहारिकता, उपयोगिता और प्रामाणिकता का व्यवस्थित, क्रमबद्ध आकलन करता है। विज्ञान है। भारत की ज्ञान-विज्ञान की परंपरा का आकलन, परीक्षण और सत्यापन्न का केन्द्र मानक पर्यावरण और प्राणी मात्र के स्वस्थ-सुख है ज्ञान और विज्ञान की भारतीय परंपरा में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या स्वार्थ का कोई स्थान नहीं है। मानव और सृष्टि के समग्र कल्याण की मानव-दृष्टि और उदार संवेदना ही भारतीय विज्ञान की सोच की विशेषता है और लक्ष्य भी।