अभिव्याक्ति की स्वतंत्रता एवं देशभक्ति

‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं देशभक्ति’ प्रस्तुत विषय पर इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान, झंडेवालान , नई दिल्ली में किया गया . सत्र का शुभारम्भ सरस्वती वंदना तथा मुख्य अतिथियों के द्वारा भारत माता पर पुष्प अर्पित कर किया गया । मुख्य अथितियों का स्वागत एवं परिचय श्रीमान विनोद शर्मा ‘विवेक’ (इ.अ.के., प्रमुख) के द्वारा कराया ग़या । डॉ. सतीश (प्राध्यापक, भगत सिंह महाविद्यालय) के द्वारा इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र का परिचय दिया गया ।

इस परिचर्चा के मुख्य वक्ता डॉ. अवानिजेश अवस्थी (प्राध्यापक) , साकेत बहुगुणा (छात्र नेता) थे व कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री विक्रमजीत बेनर्जी (अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय) ने की ।          

साकेत बहुगुणा जी ने बताया कि कैसे वामपंथी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर प्रजातंत्र को समाप्त कर रहे हैं । वामपंथी समाज में संघर्ष पैदा कर देश को तोड़ने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने साम्यवादी विचार के शिक्षकों , विद्यार्थियों व पत्रकारों के गठबंधन के षड्यंत्र के तहत हुए जे.एन.यू. तथा हाल ही में हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के घटनाक्रम की सच्चाई बताई । इन सबके बाद भी आमजन समझदार है तथा सही और गलत में स्पष्ट अंतर कर रहा है ।

डॉ. अवानिजेश अवस्थी जी ने व्यंग करते हुए कहा कि एन.जी.ओ. के फंड बंद होने के कारण स्वंत्रता पर खतरा आया । उन्होंने भारतीय परम्परा में सदा से ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रही है के अनेक उदाहरण देते हुए वर्तमान सन्दर्भ को समझाया । अंत में मीडिया के कुछ लोगों द्वारा गलत प्रचार तथा भ्रामक जानकारी देने का विरोध किया ।

श्री विक्रमजीत बेनर्जी ने अध्यक्षीय भाषण में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के संवैधानिक आयाम को समझाया । उन्होंने कहा कि हम संविधान के साथ हैं तथा संविधान के अनुसार कार्य करने में विश्वास करते हैं जबकि इसके विपरीत विरोधी विचारधारा के लोग असंवैधानिक कृत्य कर उसे संविधान के दायरे में लाना चाहते हैं । उन्होंने वामपंथियों के पश्चिम बंगाल सरकार में रहते हुए उनकी असह्ष्णुता का उदाहरण देकर बात को समाप्त किया ।

कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं से प्रश्न लिए गये जिसके उत्तर तीनों वक्ताओं ने दिए तत्पश्चात श्री अजेय जी (क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख, रा.स्व.संघ, उत्तरी क्षेत्र) द्वारा मजबूत बौद्धिक आधार बनाने के लिए अध्ययन को बढ़ाने तथा केंद्र से जुड़ने का आह्वान किया ।  श्री मनोज कुमार द्वारा कार्यक्रम में आए हुए विद्वानों एवं उपस्थित सभी सदस्यों के प्रति धन्यवाद् ज्ञापित किया गया ।