भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा : मानवीय दृष्टि

हिन्दू संस्कृति के समस्त ज्ञान का आधार वैज्ञानिकता -श्री अजेयकुमार जी

नई दिल्ली
10 जनवरी, 2021

इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, श्रेणी कार्य, दिल्ली प्रांत के द्वारा रविवार (10 जनवरी, 2021) को मकर संक्रांति मिलन का आयोजन ऑनलाइन ज़ूम के माध्यम से नई दिल्ली में किया गया। इस मिलन का प्रारम्भ सरस्वती वंदना से किया गया। तत्पश्चात इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के गीत का प्रस्तुतीकरण अत्यंत सुंदर वाणी के साथ श्री विनीत पांडे जी (सुप्रसिद्ध कवि) के द्वारा दिया गया। गीत के अनंतर सुश्री आरती जी (अध्यापिका, दिल्ली सरकार) के द्वारा इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र का परिचय, कार्य रचना व इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र का प्रतिवर्ष होने वाला प्रसिद्ध कार्यक्रम “भारत मंथन- 2021” के विषयों को भी सभा के मध्य रखा,जिसका मुख्य विषय इस वर्ष रहेगा- “भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा – मानवीय दृष्टि”

   

 

इसके अनंतर डॉ विकास शर्मा (प्राध्यापक, श्रीवेंकटेश्वरकॉलेज व प्रांत श्रेणी कार्यप्रमुख, इंद्रप्रस्थअध्ययनकेंद्र, दिल्लीप्रांत) के द्वारा कार्यक्रम के मुख्यवक्ता व अन्य आदरणीय अतिथियों का परिचय दिया गया।

इस मकर संक्रांति मिलन के मुख्य वक्ता श्रीअजेयकुमार जी (शिक्षण बौद्धिक प्रमुख,उत्तरक्षेत्र, RSS) थे, जिन्होंने सर्व प्रथम सभी सदस्यों को मकर संक्रांति, विश्व हिंदीदिवस, युवा दिवस की मंगल कामना एं प्रदानकी।उन्होंने “भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा: मानवीयदृष्टि” पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के समस्त ज्ञान का आधार विज्ञान ही है।हिन्दू संस्कृति मात्र पूजा पद्धति या व्यक्ति आधरित नहीं है अपितु यह सिद्धांत आधारित संस्कृति है, जिसमे मानव के समग्र विकास का वैज्ञानिक और  व्यावहारिक चिंतन है।मानव सेवा अग्रक्रम में है, इसके लिए हिन्दू चिंतन हमें अभय बनने की प्रेरणा देता है।

धर्म एवं कानून के विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने  “उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानंनात्मानमवसादयेत्” की अवधारणा को स्पष्ट किया और बताया कि हम भारतीय सदैव मानवता को ध्यान में रखकर ही कार्य करते है।कोई अन्य देख रहा है अथवा नहीं इसीलिए
सत्कार्य करना है, ऐसा नहीं है।मेरा अपना उद्धार होगा इस भाव से कार्य करना है।

उन्होंने भारतीय ग्रंथों का उद्धरण देते हुए कहा कि इन ग्रंथों में ऋषियों ने तत्कालीन राजधर्म, अर्थ धर्म और समाज को व्यवस्थित कैसे करना है इस का विस्तृत और सम्पूर्ण उल्लेख किया है।उन्होंने भारत मे फैले वैचारिक सम्भ्रम के प्रति भी सचेत रहने के लिए कहा।उन्होंने समाज को जागृत करते हुए कहा कि भारत के इतिहास व विभिन्न ज्ञान विज्ञान से परिपूर्ण वैज्ञानिक ग्रंथों को लेकर फैले वैचारिक षड्यंत्र से भी समाज को बचाने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता के उद्बोधन के पश्चात  जिज्ञासा समाधान का सत्र रहा।

मकर संक्रांति मिलन का समापन श्री मूलचंद जी ( प्राध्यापक व सदस्य, इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र) ने कल्याण मंत्र के द्वार किया। इस मिलन का संचालन डॉ. विवेक पंवार (प्राध्यापक, राजधानी कॉलेज) के द्वारा सम्यक रूप से किया गया। इस मिलन में श्री विनोद शर्मा जी (प्रांत प्रमुख, इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, दिल्ली), श्री ललित पराशर जी (समूह प्रमुख), श्री सुनील कम्बोज जी(इकाई प्रमुख), डॉ. मालती जी(पूर्व प्राचार्या, कालिंदी कॉलेज,DU), डॉ. प्रवीण गर्ग जी (प्राचार्य, श्रद्धानन्द कॉलेज, DU), डॉ. राकेश पांडे जी (पूर्व अध्यक्ष, NDTF) व संघ के अन्य पदाधिकारियों सहित 150 प्राध्यापक, अध्यापक, शोधार्थी, छात्र व अन्य प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। इस मिलन का फेसबुक के माध्यम से लाइव प्रसारण भी रहा, जिसे लगभग 2000 भारतवासियों के द्वारा देखा गया।