युवा : समाज निर्माण में भूमिका

20-01-2018

       ‘युवा: समाज निर्माण में भूमिका’ प्रस्तुत विषय के अंतर्गत कुल १२ उपविषय – युवा और परिवार, युवा और शिक्षा, युवा और सामाजिक मूल्य, युवा और देशभक्ति, युवा और राजनीति, युवा: जीवन शैली, युवा और उनकी समस्याएं, युवा और वैचारिक संभ्रम, युवा और सामाजिक संरचना, युवा और ग्राम विकास, युवा: दिशा और दायित्व, युवा सृष्टि : भारत दृष्टि पर इन्द्रप्रस्थ अध्ययन केन्द्र, दिल्ली द्वारा ‘प्रपत्र प्रस्तुतिकरण’ समारोह का आयोजन हंसराज महाविद्यालय, नई दिल्ली में किया गया| इस समारोह का शुभारम्भ उद्घाटन सत्र के अतिथिओं श्रीमती डॉ. मालती जी (पूर्व प्राचार्या, कालिंदी महाविद्यालय, नई दिल्ली), मा. अजय जी (क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख, रा.स्व.संघ, उत्तरी क्षेत्र) तथा श्रीमान विनोद शर्मा ‘विवेक’ (संयोजक, इ.अ.के., दिल्ली) द्वारा सरस्वती वंदना तथा माँ सरस्वती और माँ भारती के चित्रों पर पुष्पार्पण कर किया गया| मा. अजय जी द्वारा बीज भाषण में चयनित विषय के सम्बन्ध में वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भूमिका रखी| तदोपरांत विषय/समूह अनुसार सामानांतर सत्रों में प्रपत्रों का प्रस्तुतीकरण हुआ| प्रपत्र प्रस्तोताओं में प्राध्यापक, अध्यापक, शोधार्थी तथा महाविद्यालयीन छात्र शामिल थे| कुल जमा 217 पत्रों में से 79 प्रपत्र प्रस्तुत किये गए जिसमें सभी ने युवा संसार को उपरोक्त 12 उपविषयों के आधार पर अपने ढंग से बताने का प्रयास किया| कार्यक्रम में कुल संख्या लगभग 550 रही, जिसमें अतिथिगण, मूल्यांकन करने वाले विशेष आमंत्रित प्राध्यापक तथा व्यवस्था में लगे कार्यकर्ता भी सम्मलित हैं|

समापन सत्र अपरान्ह 02:30 बजे प्रारंभ हुआ, जिसकी अध्यक्षता हेतु हंसराज महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रमा जी, मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संबित पात्रा (राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी) तथा विशेष सानिध्य के लिए श्रीमती मीनाक्षी लेखी (सांसद, लोक सभा) उपस्थित रहीं| डॉ. संबित पात्रा ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य में युवा को ऊर्जा, उत्साह एवं गति का प्रतीक बताते हुए कहा कि गति सही दिशा में हो तो उसे प्रगति कहते हैं| उन्होंने बताया कि भारत 2020 तक दुनिया का सबसे युवा देश बन जाएगा, जिसकी औसत आयु 29 वर्ष होगी| वहीं ज्ञान में सतत रत भूमि के रूप में भारत को परिभाषित किया| उन्होंने युवाओं को मजदूरी से बचने तथा परिश्रम से कार्य करने को कहा क्योंकि परिश्रम सोद्देश्य होता है जबकि मजदूरी उद्देश्य रहित| आदि शंकर से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने जीवन के उद्देश्य की चर्चा की, जिसके चार आयाम बताए- 1. जीवन क्षणिक है किन्तु क्षण क्षणिक नहीं है इसलिए हर क्षण जीवन जी लेना चाहिए| 2. इच्छा केन्द्रीय शक्ति एवं दुनिया की प्रेरक तत्व होती है| सबकी एक मात्र इच्छा है – सुख की प्राप्ति| सुख ब्रह्म है भौतिक नहीं| 3. जीवन के सामान्य चक्र को तोड़कर ही महान बना जा सकता है| जैसे- आदि शंकर ने बाल्यावस्था के क्रीड़ा मोह को छोड़ा और स्वामी विवेकानन्द ने युवावस्था के सामान्य काम रुपी मोह को छोड़ा| 4. अभिमान और आसक्ति रहित जीवन जीना | इन्ही चार दिशा-निर्देशों के साथ डॉ. संबित पात्रा ने युवाओं से स्वयं को राष्ट्र निर्माण में झोंक देने का आह्वान किया|

श्रीमती मिनाक्षी लेखी ने कहा की भारत की शक्ति युवा शक्ति है| उन्होंने युवाओं को उर्जा का स्रोत बताते हुए इसे देश को संचालित करने का ईंधन कहा| अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए श्रीमती लेखी ने कहा कि युवा शक्ति ही मेरे सपनों का भारत बनाएगी| वर्तमान में उभरी नकारात्मक राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने युवाओं को सकारात्मकता का स्रोत बताया|

डॉ. रमा जी ने अपनी ओजस्वी अध्यक्षीय वक्तव्य में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का उदहारण देते हुए संकल्प, शक्ति, समर्पण एवं संस्कारों के माध्यम से युवाओं के निर्माण का आह्वान किया और यह दायित्व माता-पिता तथा गुरु पर है| उन्होंने कहा कि युवाओं में उपभोग के साथ त्याग की भावना भी होनी चाहिए, तभी वह ‘Greedy’ से ‘Needy’ बन सकता है| अंत में उन्होंने ‘जिओ और जीने दो’ व ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ में विश्वास रखते हुए, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की संकल्प सिद्धि तक ले जाने का आह्वान किया|

समारोह के समापन सत्र में ही सभी अद्यापकों और प्राध्यापकों तथा उत्तम लेख व प्रस्तुतीकरण करने वाले छात्रों को प्रोत्साहन पुरुस्कार प्रदान किये गए| अंत में श्री मनोज कुमार (सदस्य, इं.अ.केन्द्र) द्वारा कार्यक्रम में आए हुए विद्वानों एवं उपस्थित सभी सदस्यों के प्रति धन्यवाद् ज्ञापित किया गया । समारोह का संचालन श्रीमती मोनिका पुरी (सदस्य, इं.अ.केन्द्र) और श्री राधेश जी (सदस्य, इं.अ.केन्द्र) के द्वारा किया गया| समारोह में अन्य गणमान्य जनों ने भाग लिया जिनमें प्रमुख रूप से श्रीमान महेश जी (पूर्व महापौर, दिल्ली), श्री चिंतन जी (प्रान्त प्रचारक, रा.स्व.संघ, गुजरात) श्री दयानंद जी (सह प्रान्त कार्यवाह, रा.स्व.संघ, दिल्ली), श्री उत्तम प्रकाश जी (प्रान्त बौद्धिक प्रमुख,दिल्ली) उपस्थित रहे|